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छोटी गौरैया

रोज़ सवेरे एक गौरैया मेरी खिड़की पर आती हैज़ोर ज़ोर से चूं चूं करकेकबूतर की शिकायत लगाती है जब जाती...

नींद की पीड़ा

नींद सोचती होगी कहां कैद हो गई मैं यही कहती होगी तुमसे….थोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो अंधेरे के...

उसकी आँखें

चेहरे पर चमक तो बहुत है और होठों पर मुस्कुराहट हमेशा रहती हैबोलती है बहुत ही संजीदा सेजैसे कानों में...

वह बाज़ार

वह बाज़ार कभी अपना सा लगता था जहां अपनों का मेला सा लगता थाजाते थे जब वहां पर हमहर मोड़...

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