Author name: Shipra Garg

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क्या फांसी की सज़ा होनी चाहिए या नहीं??

अभी कुछ समय पहले किसी ने सवाल किया की फांसी की सज़ा होनी चाहिए या नहीं?फांसी मतलब मृत्युदंड…बहुत सोचा उस बारे में तो हमेशा सुनी एक बात याद आई-जीवन व मृत्यु जो धरती के सबसे बड़े सत्य हैं वह ईश्वर के हाथ में है। मनुष्य कोई नहीं है जो इन दो सच को झुठला सके। यह दोनों सत्य कब, कहां और कैसे पूरे होंगे यह बस ईश्वर जानते हैं।रही बात फांसी की कि वह होनी चाहिए या नहीं उसके लिए कुछ कहना पूरी तरह सही नहीं होगा क्योंकि उसके पीछे बहुत से कानूनी तथ्य हैं। बाकी अगर किसी को फांसी होती है तो वह भी प्रभु की इच्छा होती है उसको उस तरीके से मृत्यु देने की। फांसी की सज़ा सुनाने वाला और देने वाला वह इंसान तो सिर्फ़ ज़रिया होते हैं।अगर हम वापस इसी सवाल पर आते हैं, “क्या फांसी की सज़ा होनी चाहिए?” तो एक आम इंसान की तरह मेरा मानना है की जो इंसान किसी भी असहाय/ मासूम को जान से मारता है सिर्फ़ अपनी ताकत दिखाने के लिए या दूसरों की नज़र में अपना डर बैठाने के लिए तो ऐसे इंसान को फांसी मिलनी चाहिए। अपने ब्लॉग के ज़रिए मैंने अपना जवाब आपसे साझा करा है और अब इंतज़ार है आपके जवाब का….

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ज़िम्मेदार कौन?

हम लोग अक्सर अखबारों में या न्यूज़ चैनलों पर युवाओं के किसी न किसी जाल में फंसे जाने के बारे में पढ़ते और सुनते हैं।इसके लिए किसको ज़िम्मेदार ठहराना सही है? बाहर वाला, बच्चे या परिवार। आखिर ज़िम्मेदार कौन है?एक उम्र में बच्चे नासमझी कर सकते हैं, परन्तु किसी की बातों में आकर सोच समझ कर युवाओं का गलत कदम उठाना तभी मुमकिन है अगर उनमें परिवार के लिए आदर और प्यार न हो। यहां ज़िम्मेदारी मां-बाप की भी बनती है के वो बचपन से बच्चों के साथ थोड़ा ही सही पर मूल्यवान समय व्यतीत करें।मेरा मानना है कि परिवार अगर संस्कारों से जुड़ा रहता है तो किसी बाहर वाले के लिए युवाओं को बहलाना फ़िज़ूल है। परिवार में एकजुटता और संस्कार मज़बूत जड़ का काम करते हैं। कोई भले ही ज़ोर ज़बरदस्ती कर ले, परन्तु चालाकी से पेड़ को अपनी ज़मीन से अलग नहीं कर सकता। आज अपनी वेबसाइट के माध्यम से मैं अपने मन की बात पाठकों के सामने व्यक्त कर पा रही हूं। मैं पूरी उम्मीद करती हूं कि आप लोग मेरे विचारों से सहमत होंगे। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है, ज़रूर लिखें।

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अद्भुत भारत

Necessity is the mother of invention…. Hindustan ka ek aam Aadmi ise jugad kehta hai. Come and meet Sagar..the aam aadmi of ‘Adbhut Bharat’. ऋषिकेश के #त्रिवेणी #घाट की सीढ़ियों पर #सागर की हाथ की गरमा गरम पत्ती वाली या हर्बल चाय का मज़ा लें।ये चाय वह किसी गैस चूल्हे पर नहीं बनाते बल्कि उन्होंने एक पुराने कनस्तर को काटकर अपने हिसाब से मॉडिफाई करा है और उसको चूल्हे की तरह यूज़ करते हैं। इनकी छलनी में एक नेट भी लगी है जिसमें पत्ती डालकर उससे चाय चलाते रहते हैं। साथ में एक केतली और एक बाल्टी भी देख सकते हैं, बाल्टी में वह चाय बनाने का और सर्व करने का सामान रखते हैं। तो आइए त्रिवेणी घाट पर गंगा जी के दर्शन करते हुए सागर की चाय का भरपूर स्वाद लें।

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