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भूल गया हूं गुलाब का फूल रखना कोट की जेब में भूल गया हूं आजकल गुलाब का फूल रखना कोट...

आज दिल मेरा उड़ता परवाज़ है जो कभी थक कर था बैठा पंख कटे नहीं थे उसके फिर भी उसको...

रोज़ सवेरे एक गौरैया मेरी खिड़की पर आती हैज़ोर ज़ोर से चूं चूं करकेकबूतर की शिकायत लगाती है जब जाती...
उठी थी वह चमक बड़ी कमज़ोर सी बुलंद हौसलों ने ऐसी ताप दीहिला दी नींव मज़बूत दीवारों कीबुझते बुझते कईं...

नींद सोचती होगी कहां कैद हो गई मैं यही कहती होगी तुमसे….थोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो अंधेरे के...

चेहरे पर चमक तो बहुत है और होठों पर मुस्कुराहट हमेशा रहती हैबोलती है बहुत ही संजीदा सेजैसे कानों में...

वह बाज़ार कभी अपना सा लगता था जहां अपनों का मेला सा लगता थाजाते थे जब वहां पर हमहर मोड़...

लिए बांसुरी हाथों में सुर मिला के साज़ों मेंक्या मंत्रमुग्ध कर पाओगेहाथ में लिए बांसुरीक्या तुम कान्हा बन जाओगे सजा...

कभी तो बोलो कुछ मुझसे टटोलो कभी तो मन मेरापूछो उसमें राह मुझसेहर कोना कहेगा कुछ मेरा मिलेगा तुमको एक...