आज दिल मेरा उड़ता परवाज़ है…

आज दिल मेरा उड़ता परवाज़ है जो कभी थक कर था बैठा

पंख कटे नहीं थे उसके फिर भी उसको यूं ही लगता
रह जाऊंगा ज़मीन पर हमेशा मैं आसमान कभी छू नहीं सकता

बैठा रहता था अपने पंख सिकोड़ कर
अपना मुंह छिपाए उनमें आसमां था तकता
कमज़ोर हैं पंख मेरे मज़बूत सारा जहां है
चीलों और बाज़ों के बीच मैं अदना सा फाख्ता

यही सोचता हमेशा वो आसमान तक नहीं जा सकता
मानता था पर हमेशा वो एक बात
वक्त से पहले किस्मत से ज़्यादा किसी को नहीं मिलता
पर कोशिश मेरा काम है जो मैं नहीं छोड़ सकता

बेशक आसमां बहुत दूर है मन मेरा थकान से चूर है
इतना हौसला तो हूं कर सकता
गली के मोड़ तक तो हूं जा सकता

धीरे-धीरे रास्तों पर चलते हुए
पंखों को थोड़ी मज़बूती देते हुए वो कोशिश करना सीख गया
चीलों और बाज़ों को पीछे छोड़ते हुए वो उड़ना सीख गया

आज पहुंच गया बहुत ऊपर उसी आसमान को चीरता
लगता था उसको जिस तक नहीं पहुंच सकता
दिल आज मेरा उड़ता परवाज़ है जो अब कभी थक कर नहीं बैठता।।

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