
लिए बांसुरी हाथों में
सुर मिला के साज़ों में
क्या मंत्रमुग्ध कर पाओगे
हाथ में लिए बांसुरी
क्या तुम कान्हा बन जाओगे
सजा कर सर पर मोर पंख
लिए इंद्रधनुष के सारे रंग
क्या सारा जग रंग जाओगे
सजाए सर पर मोर पंख
क्या तुम कान्हा बन जाओगे
पीतांबरी चोला पहने जो चलते ग्वालों संग
गोपियों संग करें ठिठोली खेले रास रंग
वन है जिनका आंगन पर्वत जिनका दास
जितनी मोहक सूरत जिनकी उतना तेज प्रकाश
क्या लगता है स्वांग रच
तुम ऐसा क्या कर जाओगे
संग बांसुरी मोर पंख
क्या तुम कान्हा बन जाओगे?
कान्हा कान्हा रटते रहो
राधे राधे जपते रहो
कुछ और नहीं तो क्या पता
एक दिन उनको पा जाओगे
यह सोचना बेकार है
कि तुम कान्हा बन जाओगे।।