कभी तो बोलो कुछ मुझसे

कभी तो बोलो कुछ मुझसे

टटोलो कभी तो मन मेरा
पूछो उसमें राह मुझसे
हर कोना कहेगा कुछ मेरा

मिलेगा तुमको एक कोना
अरमान छुपाए जहां मैंने
कुछ कभी न कह पाई
कुछ सुन न पाए तुम मुझसे

कभी तो बोलो कुछ मुझसे

एक कोना कुछ नाराज़ सा है
शिकायतों का बाज़ार सा है
पहुंचो वहां तो थाम लेना
सब्र को संग ले चलना

चाहे बहुत कुछ कहना तुम से
कभी तो बोलो कुछ मुझसे

जानती हूं तुम्हें आदत नहीं
इतना सुनने-सुनाने की
छोड़ दो मन यूं ही मेरा
पकड़ लो राह कहीं और की

कुछ पल चाहती हूं हक से
बेशक न बोलो कुछ मुझसे।।

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