स्वीकृति

स्वीकृति परुुष को नारी समाज पर

स्वीकृति दौलत को फटेटाट पर
स्वीकृति ओहदे को जो बठै कुर्सी पर
स्वीकृति उन बालों को चांदनी सजी जिन पर
स्वीकृति उस पेड़ को जो देता छाया बौने को
स्वीकृति आसमान को जो करता तर धरती के हर कोने को
स्वीकृति मेहमान को जो आए हमारे घर या देश की धरती पर
स्वीकृति मेज़बान को जो फेरता महंु या रख देता दि ल खोलकर
स्वीकृति कि सी रंग को हैया रूप को
स्वीकृत घटुती छांव को है या ठंडी धपू को
स्वीकृति ज़बरदस्ती हैया है मजबरूी

दिल से निकली आवाज़ है या हालात की मज़ं रूी
स्वीकृति एक पल की है या सदियों की
स्वीकृति सिर्फ़ एक विचार हैया प्रतिभतिूति
क्या स्वीकार करने का अर्थपर्णू समर्थनर्थ है?
या फ़िर ये विचारों और हालातों का मथंन है?
थम जाना एक पल अब जो स्वीकारो कि सी बात को, कि सी जन को या हालात को..
सोचना क्या स्वीकृति सचमचु स्वीकारना है
या सिर्फ़ एक गर्दन का हिलाना है…..

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