क्या फांसी की सज़ा होनी चाहिए या नहीं??

अभी कुछ समय पहले किसी ने सवाल किया की फांसी की सज़ा होनी चाहिए या नहीं?
फांसी मतलब मृत्युदंड…
बहुत सोचा उस बारे में तो हमेशा सुनी एक बात याद आई-जीवन व मृत्यु जो धरती के सबसे बड़े सत्य हैं वह ईश्वर के हाथ में है। मनुष्य कोई नहीं है जो इन दो सच को झुठला सके। यह दोनों सत्य कब, कहां और कैसे पूरे होंगे यह बस ईश्वर जानते हैं।
रही बात फांसी की कि वह होनी चाहिए या नहीं उसके लिए कुछ कहना पूरी तरह सही नहीं होगा क्योंकि उसके पीछे बहुत से कानूनी तथ्य हैं। बाकी अगर किसी को फांसी होती है तो वह भी प्रभु की इच्छा होती है उसको उस तरीके से मृत्यु देने की। फांसी की सज़ा सुनाने वाला और देने वाला वह इंसान तो सिर्फ़ ज़रिया होते हैं।
अगर हम वापस इसी सवाल पर आते हैं, “क्या फांसी की सज़ा होनी चाहिए?” तो एक आम इंसान की तरह मेरा मानना है की जो इंसान किसी भी असहाय/ मासूम को जान से मारता है सिर्फ़ अपनी ताकत दिखाने के लिए या दूसरों की नज़र में अपना डर बैठाने के लिए तो ऐसे इंसान को फांसी मिलनी चाहिए।


अपने ब्लॉग के ज़रिए मैंने अपना जवाब आपसे साझा करा है और अब इंतज़ार है आपके जवाब का….

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